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न्यू इंडिया का नया रिकॉर्ड - 400 बिलियन डॉलर का व्यापार निर्यात
भारत की रिकॉर्ड 400 अरब डॉलर मूल्य के वस्तु निर्यात की उपलब्धि, इस बात का शानदार उदाहरण है कि 2014 से नागरिकों के जीवन में निर्णायक सुधार लाने के मिशन के साथ; इस देश में शासन, सुधार और निरंतर बदलाव किये जा रहे हैं।
कोविड टीकाकारण से सामान्य जीवन की ओर अग्रसर हो रहा समाज
आजकल अधिकांश लोगों के दिमाग में एक बड़ा सवाल यह भी घूम रहा है कि क्या हम कोविड महामारी से उबर चुके हैं? चूंकि कोविड पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, ऐसे में बेहतर यही है कि हम इस सवाल का जवाब तलाशें कि क्या हम एक गंभीर बीमारी या मौत के जोखिम को तय सीमा के भीतर
नई उद्योग नीति : छत्तीसगढ़ में कृषि से उद्योगों को जोडऩे की पहल
छत्तीसगढ़ की कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था को उद्योगों से जोडऩे की पहल नई उद्योग नीति में की गई है। राज्य में कृषि उत्पादनों और वनोपजों के वैल्यूएडिशन के जरिए भी लोगों को रोजगार मुहैया कराने के लिए उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
हिंद-प्रशांत में बढ़ता सहयोग और भारत
पिछले कुछ समय से ऑस्ट्रेलिया के साथ हमारे संबंध बहुत प्रगाढ़ हुए हैं. दोनों देशों के बीच राजनीतिक साझेदारी का निरंतर विस्तार हो रहा है।
धामी और मौर्य को पुरस्कार आखिर किस खुशी में
जिस बात को आत्मा स्वीकार न करे वह कभी करनी नहीं चाहिए। कौन सी राजनैतिक मजबूरी हो सकती है भाजपा की कि उसे इस प्रकार के कदम उठाने पड़ रहे हैं।
'एक देश एक चुनावÓ की दिशा में आगे बढ़ें सभी राजनीतिक दल
पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव परिणामों की घोषणा के साथ ही एक बार फिर से 'एक देश एक चुनावÓ की बात सामने आती दिख रही है।
सशक्त लोकतंत्र के लिए सशक्त विपक्ष जरूरी
उत्तरप्रदेश सहित पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों परिणामों के बाद एक बात विशेष रूप से उभर कर सामने आयी है कि सशक्त लोकतंत्र के लिये सशक्त विपक्ष बहुत जरूरी है।
पांचों राज्यों के चुनाव परिणाम में है संतुलित भविष्य के सपने का जनादेश
वर्ष 1996 के आम चुनावों के पहले तक देश की सबसे मजबूत और प्रभावी कांग्रेस पार्टी होती थी।
स्वच्छता अभियान में अहम भूमिका निभाती महिलाएं
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण (एसबीएम-जी) अभियान के दौरान महिलाओं का योगदान बिल्कुल चकित कर देने वाला रहा है।
प्रधानमंत्रियों की सूझबूझ से सामथ्र्यशाली बना भारत, बढ़ी वैश्विक पूछ
साम्यवादी सोवियत संघ यानी यूएसएसआर के पतन के साथ ही शीत युद्ध की समाप्ति के बाद पूंजीवादी अमेरिका ने जिस भूमंडलीकरण यानी ग्लोबलाइजेशन और नई आर्थिक नीति यानी न्यू इकोनॉमिक पालिसी को बढ़ावा दिया, उसे तीसरी दुनिया के देशों में नवआर्थिक साम्राज्यवाद करार दिया